वर्ष प्रतिपदा अर्थात् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा : नवसंवत्सर का महत्व
१)ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि का सृजन
२)भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया
३)सतयुग का प्रारंभ हुआ था।
४)श्रीराम का राज्याभिषेक
५)माँ दुर्गा नवरात्र साधना व्रत प्रारम्भ
६)युगाब्द का आरंभ
७)युधिष्ठिर का राज्याभिषेक
८)उज्जयिनी सम्राटविक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारम्भ
९)शालिवाहन शक संवत् (भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग) का प्रारम्भ
१०)सिख गुरु अंगददेव जी का जन्म
११)सिंध वरूणावतार संत झूलेलाल का प्रकट दिवस
१२)महर्षि दयानन्द द्वारा आर्य समाज की स्थापना
१३) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का जन्मदिवस
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवसंवत्सर प्रारम्भ होने को देश भर में विभिन्न नामो से मनाया जाता रहा है
१) वर्ष प्रतिपदा- उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड ,हिमाचल, हरियाणा राजस्थान, मध्यप्रदेश
२)गुड़ी पड़वा- महाराष्ट्र
३)बिहु – असम, उत्तरपूर्वी राज्यों में
४)चेटीचंड – सिन्ध
५)नवरेह – जम्मू और कश्मीर के काश्मीरी पण्डितों द्वारा
६)पहला बैशाख – पश्चिम बंगाल तथा बांगलादेश के बंगाली लोगों द्वारा
७)पुतान्दु – तमिलनाडु में
८)संवत्सर पद्वो – गोवा और केरल के कोंकणी लोगों द्वारा
९)वैशाखी या बैशाखी – पंजाब में
१०)विशु – केरल के लोगों द्वारा
११)उगादि – कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगण के लोगों द्वारा
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