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वेद एवं उपनिषदों के महा मंत्र

वेद एवं उपनिषदों के महा मंत्र ज्ञान के अजस्त्र स्त्रोत महासागर । सं गच्छध्वम् सं वदध्वम्।। (ऋग्वेद 10.181.2) अर्थात: साथ चलें मिलकर बोलें। उसी सनातन मार्ग का अनुसरण करो जिस पर पूर्वज चले हैं। प्रथम श्लोक… श्लोक : ।।ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।। -ऋग्वेद अर्थ : उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक,… Continue reading वेद एवं उपनिषदों के महा मंत्र

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” ऋग्वेद 1.164.46

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” ऋग्वेद (1.164.46) एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” ऋग्वेद (1.164.46) का एक प्रसिद्ध वैदिक सूक्त है, जिसका अर्थ है- “सत्य या ईश्वर एक ही है, लेकिन ज्ञानी लोग उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं”। यह सनातन धर्म में निहित विविधता में एकता, सर्वधर्म समभाव और उदारता के दर्शन को दर्शाता है, जहाँ परम… Continue reading एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” ऋग्वेद 1.164.46

सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण शक्तिशाली मंत्र श्लोक

सनातन धर्म के कुछ प्रमुख मंत्र श्लोक गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः), महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे), ॐ, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, असतो मा सद्गमय, और सर्व मंगल मांगल्ये आदि हैं ये मंत्र जीवन में शांति, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनका जाप किसी भी समय… Continue reading सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण शक्तिशाली मंत्र श्लोक

नित्य पूजा संक्षिप्त

नित्य पूजा ( संक्षिप्त ) श्री गणेशाय नमः। ॐ श्री परमात्मने नमः। ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्ये माक्षर्भि यजत्राः । स्थिरै रङ्गै स्तुष्टु वां सस्तनूभिः । व्यशेम देव हितं यदायुः ॥ (1) पवित्र करण ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा । यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।। (2) आचमनम् ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा… Continue reading नित्य पूजा संक्षिप्त

संक्षिप्त यज्ञ (हवन )पद्धति

संक्षिप्त यज्ञ-हवन पद्धति (1) हवन के उपयुक्त समिधाएं—आम, पीपल, गूलर, ढाक, बरगद, छोंकर।   (2) हवन के उपयुक्त हविष्यान्न—जौ 1 भाग, चावल 2 भाग, तिल 3 भाग, शकर 4 भाग।   (3) हवन सामग्री—चन्दन, अगर, तगर, गूगल, जायफल, जावित्री, दालचीनी, तालीस पत्र, लौंग, बड़ी इलायची, इन्द्र जौ, कपूर, कचरी, आंवला, बालछड़, नागकेशर, गिलोय, पटोल पत्र,… Continue reading संक्षिप्त यज्ञ (हवन )पद्धति

गायत्री मंत्र

गायत्री मन्त्र हिन्दू ब्राह्मणों का मूल मंत्र है, विशेषकर उनका जो जनेऊ धारण करते हैं। इस मंत्र के द्वारा वे देवी का आह्वान करते हैं। यह मंत्र सूर्य भगवान को समर्पित है। इसलिए इस मंत्र को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पढ़ा जाता है। वैदिक शिक्षा लेने वाले युवकों के उपनयन और जनेऊ संस्कार के समय भी इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है।… Continue reading गायत्री मंत्र

श्री महादुर्गा सप्तशती तथा दस महाविद्या के बीज मन्त्र

श्री महादुर्गा सप्तशती तथा दस महाविद्या के बीज मन्त्र श्री गणेशाय नमः “ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा: शांति करा भवंतु।।” ॐ कालभैरवाय नमः ॐ ह्रीं बटुकाय आपद उद्धारनाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ फट ॐ भ्रां कालभैरवाय फट् ॐ क्रीं क्रीं कालभैरवाय फट तीक्ष्ण दंष्ट्र महाकाय… Continue reading श्री महादुर्गा सप्तशती तथा दस महाविद्या के बीज मन्त्र

श्री हनुमान बालाजी उपासना

श्री गणेशाय नमः श्रीवातात्मजय नमः श्री हनुमते नमः, अंजनीसुताय नमः, वायुपुत्राय नमः, महाबलाय नमः, रामेष्टाय नमः, फाल्गुण सखाये नमः, पिंगाक्षाय नमः, अमितविक्रमाय नमः, उदधि क्रमणे नमः, सीता शोक विनाशने नमः, लक्ष्मण प्राणदात्रे नमः, और दशग्रीव दर्पहा नमः “मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥” हनुमान जी के मंत्र  ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं… Continue reading श्री हनुमान बालाजी उपासना

श्री महागणपति मंत्र

जय श्री चिंतामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति सदा प्रसन्न 1स्वस्ति वाचनम् ॐ गणानांत्वा गणपति हवामहे प्रियाणांत्वा प्रियपति हवामहे निधीनांत्वा निधिपति हवामहे वसोमम । आहमजानिगर्भधमात्वमजासिगर्भधम् ।।1।। ॐ स्वस्तिनऽइन्द्रोवृद्धश्रवाः स्वस्तिनः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्तिनस्ताक्र्ष्योऽअतरिष्ट नेमिः स्वस्तिनो वृहस्पतिर्दधातु ।।2।। ॐ पयः पृथिव्यां पयऽओषधीषु पयोदिव्यन्तरिक्षे पयोधाः । पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम् ।।3।। ॐ विष्णोः राटमसि विष्णोः श्नप्त्रेस्थोः विष्णोः स्पूरसि विष्णोर्ध्रुंवोऽसि… Continue reading श्री महागणपति मंत्र

प्रार्थना

प्रार्थना जय श्री चिंतामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति देव सदा प्रसन्न!! जय माँ हो श्री हरसिद्धि देवी सदा प्रसन्न !! जय माँ श्री पीताम्बरा बग़लामुखी देवी सदा प्रसन्न !! जय श्री महाकाल !! ॐ ब्रह्मानन्द परम सुखदं, केवलं ज्ञानमूर्तिं, द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं, तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं, सर्वधीसाक्षिभूतं, भावातीतं त्रिगुणरहितं, सद्गुरू तं नमामि॥ अखण्डानन्दबोधाय, शिष्यसंतापहारिणे। सच्चिदानन्दरूपाय, तस्मै श्री… Continue reading प्रार्थना