Jagrayam Foundation

श्री हनुमान बालाजी उपासना

श्री गणेशाय नमः श्रीवातात्मजय नमः श्री हनुमते नमः, अंजनीसुताय नमः, वायुपुत्राय नमः, महाबलाय नमः, रामेष्टाय नमः, फाल्गुण सखाये नमः, पिंगाक्षाय नमः, अमितविक्रमाय नमः, उदधि क्रमणे नमः, सीता शोक विनाशने नमः, लक्ष्मण प्राणदात्रे नमः, और दशग्रीव दर्पहा नमः “मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥” हनुमान जी के मंत्र  ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं… Continue reading श्री हनुमान बालाजी उपासना

Published
Categorized as Sadhna

श्री महागणपति मंत्र

॥ श्री महागणपति मंत्र जपः || 1. स्वस्ति वाचनम् हाथ में जल, पुष्प, अक्षत लेकर स्वस्ति वाचन बोला जाय। यह शुभ कार्यों की सफलता, शान्ति, सार्थकता एवं मंगलमय पूर्ति के समय कल्याण कारक मन्त्र है। ॐ गणानांत्वा गणपति हवामहे प्रियाणांत्वा प्रियपति हवामहे निधीनांत्वा निधिपति हवामहे वसोमम । आहमजानिगर्भधमात्वमजासिगर्भधम् ।।1।। ॐ स्वस्तिनऽइन्द्रोवृद्धश्रवाः स्वस्तिनः पूषा विश्ववेदाः ।… Continue reading श्री महागणपति मंत्र

देश बना गणतंत्र , सर्वोच्च बन लागू हुआ भारत का संविधान !

क्यो है भारत का संविधान सर्वोच्च : क्योंकि उससे जुड़ी है हर देश वासी , राष्ट्र भक्त की आत्मा और उसका प्रतिबद्ध प्राण संकल्प । संविधान सभा में देश के सभी भागो क्षेत्रों वर्गों के अप्रतिम योग्यता धारक विद्वान मनीषी समाजसुधारक विधिवेत्ता शिक्षक राष्ट्र भक्त सम्मिलित थे । ऐतिहासिक घटनाक्रम उद्देश्य व गठन: संविधान सभा… Continue reading देश बना गणतंत्र , सर्वोच्च बन लागू हुआ भारत का संविधान !

प्रार्थना

प्रार्थना जय श्री चिंतामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति देव सदा प्रसन्न!! जय माँ हो श्री हरसिद्धि देवी सदा प्रसन्न !! जय माँ श्री पीताम्बरा बग़लामुखी देवी सदा प्रसन्न !! जय श्री महाकाल !! ॐ ब्रह्मानन्द परम सुखदं, केवलं ज्ञानमूर्तिं, द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं, तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं, सर्वधीसाक्षिभूतं, भावातीतं त्रिगुणरहितं, सद्गुरू तं नमामि॥ अखण्डानन्दबोधाय, शिष्यसंतापहारिणे। सच्चिदानन्दरूपाय, तस्मै श्री… Continue reading प्रार्थना

ईशावास्यमिदं सर्वं : सम्पूर्ण चराचर जगत ईश्वर से आच्छादित है

ईशावास्यम् इदं सर्वम्” का अर्थ है कि जो कुछ भी इस संसार में है, वह सब ईश्वर (परम सत्ता) से व्याप्त या आच्छादित है। यह मंत्र ईशावास्योपनिषद का पहला मंत्र है, जो यह सिखाता है कि इस ब्रह्मांड की हर वस्तु ईश्वर की है, और हमें त्याग की भावना से उसका भोग करना चाहिए, दूसरों… Continue reading ईशावास्यमिदं सर्वं : सम्पूर्ण चराचर जगत ईश्वर से आच्छादित है

आत्मवत् सर्वभूतेशु सभी को अपना जैसा समझ व्यवहार करे

आत्मवत् सर्वभूतेषु” (ātmavat sarvabhūteṣu) का अर्थ है सभी प्राणियों को स्वयं के समान देखना. यह एक संस्कृत उक्ति है जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति सभी जीवित प्राणियों को अपनी आत्मा के समान समझता है और उन्हीं के साथ वैसा ही व्यवहार करता है जैसा वह स्वयं के साथ करता है, वही सच्चा विद्वान या… Continue reading आत्मवत् सर्वभूतेशु सभी को अपना जैसा समझ व्यवहार करे

Published
Categorized as Darshan

वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः “हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे”

वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः यजुर्वेद के नौवें अध्याय की 23वीं कंडिका से लिया गया है। इसका अर्थ है, ‘हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे।’ वाज॑स्ये॒मं प्र॑स॒वः सु॑षु॒वेऽग्रे॒ सोम॒ꣳ राजा॑न॒मोष॑धीष्व॒प्सु। ताऽअ॒स्मभ्यं॒ मधु॑मतीर्भवन्तु व॒यꣳ रा॒ष्ट्रे जा॑गृयाम पु॒रोहि॑ताः॒ स्वाहा॑ ॥२३॥ पद पाठ वाज॑स्यः। इ॒मम्। प्र॒स॒व इति॑ प्रऽस॒वः। सु॒षु॒वे। सु॒सु॒व॒ इति सुसुवे। अग्रे॑। सोम॑म्। राजा॑नम्।… Continue reading वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः “हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे”

Published
Categorized as Darshan

अहंब्रह्मास्मि” का अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ” या “मैं ही वह परम सत्य हूँ”

अहं ब्रह्मास्मि” का अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ” या “मैं ही वह परम सत्य हूँ” अहं ब्रह्मास्मि” का अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ” या “मैं ही वह परम सत्य हूँ”. यह एक महावाक्य है जो यह बताता है कि हर व्यक्ति में असीमित शक्ति और चेतना का अंश है, जिसे ब्रह्म कहते हैं. यह वाक्य… Continue reading अहंब्रह्मास्मि” का अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ” या “मैं ही वह परम सत्य हूँ”

Published
Categorized as Darshan

अयं आत्मा ब्रह्म “यह आत्मा ही ब्रह्म है “

अयं आत्मा ब्रह्म” का चित्र प्राप्त करना सीधा संभव नहीं है, क्योंकि यह एक दार्शनिक महावाक्य है न कि कोई दृश्य वस्तु. इसका अर्थ है “यह आत्मा ही ब्रह्म है”, जो अथर्ववेद के मांडूक्य उपनिषद से लिया गया है. इसका कोई विशिष्ट चित्र नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तिगत आत्मा और ब्रह्मांडीय ब्रह्म की एकता और… Continue reading अयं आत्मा ब्रह्म “यह आत्मा ही ब्रह्म है “

Published
Categorized as Darshan

तत्त्वमसि “में और तुम, हम सब एक ही है”

तत्त्वमसि” एक संस्कृत महावाक्य है जिसका अर्थ है “तू वही है” या “वह तुम ही हो”। अर्थात् में और तुम एक ही है । हम सब एक ही है । यह हिन्दू धर्म के छांदोग्य उपनिषद से लिया गया है और अद्वैत वेदांत दर्शन का एक प्रमुख वाक्य है। यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत आत्मा… Continue reading तत्त्वमसि “में और तुम, हम सब एक ही है”

Published
Categorized as Darshan