अयं आत्मा ब्रह्म” का चित्र प्राप्त करना सीधा संभव नहीं है, क्योंकि यह एक दार्शनिक महावाक्य है न कि कोई दृश्य वस्तु. इसका अर्थ है “यह आत्मा ही ब्रह्म है”, जो अथर्ववेद के मांडूक्य उपनिषद से लिया गया है. इसका कोई विशिष्ट चित्र नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तिगत आत्मा और ब्रह्मांडीय ब्रह्म की एकता और… Continue reading अयं आत्मा ब्रह्म “यह आत्मा ही ब्रह्म है “